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एसपी वरुण सिंगला की सूझबूझ से नूंह जिले में खुलेआम सड़क पर पतीलों में बिकने वाली बिरयानी अब कही नजर नहीं आती।

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• पुलिस की सूझबूझ से नूंह जिले में खुलेआम सड़क पर पतीलों में बिकने वाली बिरयानी अब कही नजर नहीं आती।

• बिरयानी के लिए मशहूर गांव घासेड़ा में खाली पड़ी हैं बिरयानी की दुकानें।

• मेवात में गौकशी पर नकेल कसने में ड्रोन कैमरा और ग्रामीणों का खाकी को मिल रहा ही भरपूर साथ

 

 

 

यूनुस अलवी

नूंह/मेवात/हरियाणा

 

जिस कार्य को हरियाणा गोसेवा आयोग की काऊ प्रोटेक्षन टास्क फोर्स 2016 में नही कर सकी अब उस कार्य को नूंह जिला के पुलिस कप्तान वरुण सिंगला ने बिना किसी विवाद के ग्रामीणों के सहयोग से कर दिखाया है। हम बात कर रहे हे। मेवात में गोहत्या रोकने और बिरयानी की आड़ में बिकने वाले बीफ की। अब मेवात में गौहत्या न के बराबर होती है वही दिल्ली अलवर रोड हो या फिर नगीना होडल रोड पर सड़क के किनारे खुले आम हजारों पतीलों में बिकने वाली बिरयानी कहीं भी नजर नहीं आती है। भले ही इन पतीलों में पहले भैंस या कटड़े के मांस की बिरयानी बिकती हो लेकिन शक यही होता था की इन पतीलों में बीफ की बिरयानी बेची जाती है।

सितंबर 2016 में हरियाणा गौसेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन भानी राम मंगला ने गौहत्या रोकने के लिए वरिष्ठ आईपीएस भारती अरोड़ा की अगुवाई में गठित काऊ प्रोटेक्षन टास्क फोर्स भी इन बिरयानी के पतीलों को बंद कराने में नाकाम हो गई थी। वही पतीलों में बेची जाने वाली बिरयानी का सितंबर 2016 में सैंपल लेने पर काफी विवाद भी खड़ा हो गया था। आखिर कार हरियाणा सरकार ने पतीलों में बिकने वाली बिरयानी की जांच कराने से अपने हाथ पीछे खींच लिए थे।

फोटो ऐतिहासिक गांव गांधी ग्राम घासेड़ा में खाली पड़े बिरयानी के तख्त

 

अब नूंह पुलिस कप्तान वरुण सिंगला बिना किसी विवाद के जिले में होने वाली गौहत्या पर जहां करीब 90 फीसदी रोक लगाने में कामयाब हो गए हैं वही दिल्ली – अलवर रोड और नगीना – होडल रोड पर हजारों की संख्या में स्टॉल लगाकर तख्तों पर रखकर बेची जाने वाली बिरयानी अब कही नजर नहीं आती है। अगर कोई बेचता भी नजर आता है तो वह चिकन की बिरयानी बेच रहा है। मेवात पुलिस इसे एक बड़ी कामयाबी मानकर चल रही है। मेवात के पुलिस अधिकारी इस कामयाबी के लिए गांवो की पंचायतों, प्रमुख लोगो और विभाग द्वारा संदिग्ध गोकसी के गांवों में ड्रोन से की जा रही निगरानी को मानकर चल रहे है।

मेवात में गौकशी तथा गौतस्करी में कमी देखने को मिल रही है, न केवल गौकशी की घटनाएं कम हुई हैं बल्कि दूसरे राज्यों से गायों की तस्करी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है। यही कारण है कि नूंह जिले में एक – एक गांव में कई – कई दर्जन बिरयानी के पतीले अब पूरी तरह से गायब हो चुके हैं। खाकी की सख्ती के साथ – साथ इसमें आमजन के सहयोग की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है। ऐतिहासिक गांधी ग्राम घासेड़ा में बिरयानी के बर्तन पतीले का अब पूरी तरह से सफाया हो चुका है। जहां कई दर्जन बिरयानी के पतीले गुरुग्राम अलवर राष्ट्रीय राजमार्ग पर घासेड़ा गांव में दिखाई पड़ते थे, अब वहां दूरबीन से देखने पर भी एक भी पतीला नजर नहीं आता। गौकशी तथा गौतस्करी की वारदातों में कमी आने से ना केवल स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है बल्कि पुलिस विभाग के अधिकारी भी लोगों के सहयोग की सराहना कर रहे हैं।

 

आपको बता दें कि हरियाणा का मुस्लिम बाहुल्य नूंह जिला गौकशी तथा गौतस्करी के लिए काफी बदनाम था। यही वजह थी कि बजरंग दल से जुड़े लोग आए दिन किसी न किसी घटना को अंजाम देते थे। जिसकी वजह से न केवल कई लोगों की जान गई बल्कि काफी लोग मारपीट के दौरान घायल भी हुए। इस तरह की वारदातों से स्थानीय लोगों के साथ – साथ पुलिस महकमे की फजीहत हो रही थी। कानून हाथ में लेकर कार्रवाई करने वाले बजरंग दल से जुड़े लोगों की जमकर निंदा भी हुई। सड़क से विधानसभा तक में बजरंग दल की कार्रवाई पर सवाल उठे। सरकार ने गौकशी तथा गौतस्करी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने शुरू किए।

पुलिस अधीक्षक वरुण सिंगला नूंह ने गौकशी तथा गौतस्करी को रोकने के लिए न केवल गोवंश से जुड़े पुराने मुकदमों में आरोपियों की धरपकड़ तेज की तो गौकशी तथा गौतस्करी पर ड्रोन इत्यादि से भी नजर रखी जाने लगी। पुलिस विभाग के अधिकारी फील्ड में उतरे और गांव – गांव जाकर लोगों से गौकशी तथा गौतस्करी रोकने की अपील की। लोगों ने भी गांव में बदनामी के दाग को धोने के लिए कमेटियां बनाई और गौकशी तथा गौतस्करी से जुड़े लोगों पर नजर रखी। उसका असर चंद दिनों बाद ही दिखाई देने लगा। जिस इलाके में बड़े पैमाने पर गौहत्या की बात की जाती थी, अब उस इलाके में छुटपुट घटनाएं सामने आ रही हैं। अभी भी पुलिस विभाग पूरी तरह से सतर्क है और इस बुराई को पूरी तरह से दूर करने के लिए आमजन का सहयोग ले रहा है। जिन गांवों में अधिकतर गौकशी की जाती थी, उनको चिन्हित कर सबसे पहले पुलिस विभाग ने उन्हीं में जागरूकता अभियान चलाया और ग्रामीणों के सहयोग से कमेटियों का गठन किया। हर गांव में पुलिस विभाग का एक जवान ग्राम प्रहरी के रूप में नियुक्त किया जो गांव के लोगों की हर हरकत पर नजर रखने का काम कर रहा है। कुल मिलाकर जो जिला चंद दिनों पहले तक गौकशी तथा गौतस्करी के लिए पूरे देश भर में बदनाम था, अब उसमें काफी सुधार देखने को मिल रहा है। पुलिस की सख्ती व लोगों का सहयोग इसी तरह जारी रहा तो वह दिन दूर नहीं जब गौहत्या इस इलाके से पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी।

गौकशी तथा गौतस्करी के आरोप में सबसे पहले पहली, रकबर, और अब भरतपुर जिले के पहाड़ी तहसील के घाटमीका गांव के नासिर व जुनैद को जिंदा जलाने की घटना लोगों के सामने आई तो हर किसी ने इसकी निंदा की। नूंह जिला अब पुरानी बातों को भूल कर आगे बढ़ने में पुलिस विभाग का जी तोड़ सहयोग कर रहा है।

क्या कहते एसपी नूंह

नूंह पुलिस कप्तान वरुण सिंगला का कहना है की ये सब लोगो के सहयोग से ही संभव हो सका है। उनका कहना है की नूंह जिला में गौहत्या रोकने में सहयोग करने के लिए जिले की 325 ग्राम पंचायतों में प्रस्ताव कर खुद गौहत्या रोकने में पहल शुरू की थी। वही गोकसी के लिए बदनाम गावो में ड्रोन से निगरानी भी रखी जा रही है। ग्राम पंचायत गोहत्यारों का जहां सामाजिक बहिष्कार उनपर जुर्माना लगा कर पुलिस के हवाले कर रहे है। जिस कारण गोस्करों और गोकसी करने वालों में काफी कमी आई है।

 

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